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मेहरा ब्रद्रसो ने कुरूति का किया नाश

आज के युग में दहेज प्रथा बहुत बडी कुरूति के रूप में उभर कर सामने आई है। परन्तु आज के समय में भी दहेज रूपी कुरूति को समाप्त करने में लोग पीछे नही है। अधिकतर लोगो कि मानसिकता रहति है कि कुछ आर्थिक द्ष्टी से मजबूत लोग सोचते है कि हमारे पुत्र को दहेज नही मिला हो हमारी बेइज्जती होगी ,लोग क्या कहेगे । तथा जो लोग आर्थिक द्ष्टी से कमजोर है वो आर्थिक द्ष्टी से मजबूत लोगो का अनुसरण कर दहेज में सब कुछ न्यौछावर कर पूरा जीवन कर्ज में डूब जाते है। हम आपको दो परिवारो से रूबरू करवाना चाहते है वो परिवार आर्थिक द्ष्टी से मजबूत लोग है लेकिन आज के समय में अपनी शादी में एक रूपया लेकर शादी की। पहला नया बास में स्व. रामनारायण बैरवा जो सरकारी सेवा में कार्यरत थे। उनका एक पुत्र राकेश मेहरा जो कि रेल्वे में लोको पायलेट है उसने बिवाई निवासी मोहन लाल की पुत्री नीतू से शादी की व शादी में नेग स्वरूप केवल एक रूपया लिया । दुसरा पुत्र दिलीप मेहरा जो कि व्याख्याता पद पर कार्यरत है। उसने कुटी निवासी हरिशचन्द की पुत्री ममता से शादी की व शादी में नेग स्वरूप केवल एक रूपया लिया व समाज में मिशाल कायम की । शादीया हर वर्ष सैकडो- हजारो की संख्या में होती है,लेकिन जो लोग लीख से हटकर कार्य करते है लोग वर्षो तक उनको याद करते है। आज से करीब दो दशक पहले बालकिशन बैरवा पूर्व सरपंच,पिछले दिनो महेश वेद आदी ने मात्र एक रूपया लेकर शादी की उनके प्रयासो को लोग आज भी याद करते है। तथा उनके समय में सैकडो शादिया हुई थी उनको कोई याद नही करता । इस बारे में दिलीप मेहरा व्याख्याता ने बताया की समाज में एक पहल की आवश्यकता होती है। किसी व्यक्ति द्वारा उठाया गया कदम और व्यक्तियो को प्रेरित करता है।इससे समाज में धीरे -धीरे बदलाव जरूर आयेगा । में चाहता हूँ कि मेरे कदम की तरह और लोग भी चले तो तो दहेज रूपी कुप्रथा का अन्त सम्भव है। दुसरा परिवार प्रेमचन्द मेहरा,प्रधानाध्यापक निवासी आशापुरा हाल निवासी ग्रीन पार्क कॉलोनी में शुशील मेहरा ने दौसा निवासी अरूणा से व अनिल मेहरा ने जयपुर निवासी किरण से बिना दहेज के विवाह किया , जिससे समाज को एक नई दिशा मिली । इस बारे में पे्रमचन्द मेहरा अध्ययपक से बात कि तो उन्होने बताया कि दहेज प्रथा हमारे समाज में एक अभिशाप है। चूकी हमारा समाज पहले से ही पिछडा एवं शोषित समाज है, हमे दहेज पर रोक लगाानी चाहीये व उन पैसो से बच्चो को अच्छाी शिक्षा दिलवानी चाहीये। जिससे समाज को उचित दिशा मिलें। समाज के कुछ वीरवानो लोगो ने एक नया सन्देश देकर समाज को एक नई दिशा दी ,लेकिन समाज के प्रतिष्ठीत लोगो का,सामाजिक संस्थाओं का दायित्व बनता है कि समय – समय पर सामाजिक कार्यक्रमो में ऐसे लोगो को सम्मानित करेँ जिससे दुसरे लोग भी इसका अनुसरण करे।

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