आईपीएल से वल्र्ड कप : कितने थके हुए हैं भारतीय क्रिकेटर्स

भारतीय क्रिकेटर्स बीते काफी समय से लगातार खेल रहे हैं। कुछ लोगों का मानना है कि कहीं इस थकान का असर वल्र्ड कप में खिलाडिय़ों के प्रदर्शन पर नजर आ सकता है। में से कुछ लोग कुछ दिनों तक क्रिकेट बैट देखना भी नहीं चाहते। 1992 विश्व कप से पहले एक भारतीय टीम के एक क्रिकेटर ने यह बात कही थी। इसकी वजह यह थी कि भारतीय टीम ने विश्व कप से पहले ऑस्ट्रेलिया का एक लंबा दौरा किया था। इसमें टीम इंडिया ने पांच टेस्टए एक लंबी ट्राएंगुलर सीरीज खेली थी। ऐसे में खिलाडिय़ों की यह टिप्पणी समझी जा सकती थी। 2019 में आपको ऐसी ही आवाजें मौजूदा भारतीय कैंप से भी सुनी जा सकती हैं। टीम इंडिया के खिलाड़ी वल्र्ड कप से पहले लगभग दो महीने लंबे आईपीएल का हिस्सा रहे हैं। इसका अर्थ है कि खिलाडिय़ों ने इस दौरान लगभग 14.17 मैच खेले हैं और पूरा भारत.दर्शन किया है।
चेन्नै सुपर किंग्स के साथी खिलाडिय़ों के साथ सफर करते हुए महेंद्र सिंह धोनी की चेन्नै एयरपोर्ट पर सोते हुए एक तस्वीर वायरल हो गई थी। यह तस्वीर अपने आप में पूरी कहानी कहती है। आईपीएल के बिजी शेड्यूल को देखते हुए कहा जा सकता है कि खिलाडिय़ों को आराम करने का पूरा वक्त शायद ही मिलता हो। खिलाडिय़ों को सिर्फ शारीरिक रूप से नहीं बल्कि मानसिक रूप से भी काफी थकान होती है। कोई हैरानी की बात नहीं कि इंग्लैंड की फ्लाइट पकडऩे से पहले कुछ खिलाड़ी जिन्हें जरूरी स्पॉन्सर कमिटमेंट भी पूरे करने थेए काफी थके हुए नजर आ रहे थे। हैरानी की बात है कि 2009 में इंग्लैंड आईपीएल से होने वाली चुनौतियां सबसे पहले नजर आई थीं। 2009 में महेंद्र सिंह धोनी की टीम साउथ अफ्रीका में आईपीएल खेलने के बाद वल्र्ड टी20 खेलने पहुंची थी। टीम अपना खिताब नहीं बचा पाई थी और उसे सुपर 8 स्टेज में ही बाहर होना पड़ा था। हालांकि यह बात भी सच है कि भारत ने तब से आईपीएल के बाद होने वाले टूर्नमेंट में अच्छा प्रदर्शन किया है। 2013 में टीम ने चैंपियंस ट्रोफी जीती और 2017 में वह चैंपियंस ट्रोफी के फाइनल तक पहुंची। लेकिन भारतीय खिलाडिय़ों पर वर्कलोड को लेकर उठ रहे सवाल इस बार काफी सही नजर आ रहे हैं। बीसीसीआई ने आईपीएल शुरू होने से पहले यह आश्वासन दिया था कि वल्र्ड कप जाने वाले खिलाडिय़ों के वर्कलोड को लेकर फ्रैंचाइजी टीमों से बात हो रही है लेकिन लीग के दौरान ऐसा बहुत कम नजर आया। यहां तक कि तेज गेंदबाजए जिन्हें चोट लगने की आशंका सबसे ज्यादा हैए वे भी लगभग सभी मैचों में खेलते नजर आए। पूर्व भारतीय कप्तान दिलीप वेंगसरकर ने कहाए श्यह एक बिलकुल अलग प्रारूप होगा। गेंदबाजों को 10 ओवर बोलिंग करनी होगीए चार नहीं। उन्हें इस प्रारूप के हिसाब से खुद को बहुत जल्दी ढालना होगा। उन्हें अपने माइंडसेट को भी टी20 से वनडे प्रारूप के हिसाब से ढालना होगा। कुल मिलाकर उन्हें वनडे प्रारूप के हिसाब से खेलना होगा। भारतीय टीम के लिए मुश्किलें बढ़ाने के लिए इस बार वल्र्ड कप 1992 के प्रारूप के हिसाब से खेला जा रहा है। इसमें सभी 10 टीमें एक.दूसरे के खिलाफ मुकाबला खेलेंगी। इसके बाद सेमीफाइनल और फाइनल मैच होंगे। कप जीतने के लिए किसी भी टीम को 13 मैचों में अच्छा प्रदर्शन करना होगा। इसमें किसी भी टीम को मानसिक और शारीरिक रूप से मजबूत खेल दिखाना होगा। हालांकि एक अहम खिलाड़ी ने इन थकान से भारतीय टीम के अवसरों पर पडऩे वाले असर को पूरी तरह खारिज किया है। चूंकि भारत का पहला मुकाबला 5 जून हो साउथ अफ्रीका के खिलाफ हैए जो 12 मई को खेले गए आईपीएल फाइनल के लगभग 24 दिन बाद है। खिलाड़ी ने कहा आईपीएल और विश्व कप के बीच काफी समय है। एक क्रिकेटर के तौर पर ब्रेक से आकर खेलने के बजाए लगातार खेलते रहने के अपने फायदे होते हैं।
हमारे सभी खिलाड़ी अनुभवीए फि ट हैं और अच्छा खेल रहे हैं। हमने इस बार उन्हें यो.यो टेस्ट से नहीं गुजारा वे हाल ही में आईपीएल खेलकर आए हैं। इस समय केदरा जाधव जो आईपीएल में चेन्नै सुपर किंग्स की ओर से खेलते हुए चोटिल हो गए थे। भी नैशनल क्रिकेट अकादमी में अच्छी तरह फिटनेस हासिल कर रहे हैं। उन्होंने ट्रेनिंग शुरू कर दी है। जो लोग पूरी प्रक्रिया का हिस्सा हैं और खिलाडिय़ों को करीब से जानते हैं उन्हें मालूम है कि खिलाड़ी इस बड़े टूर्नमेंट के लिए पूरी तरह तैयारी हैं।
पूर्व मुख्य चयनकर्ता और विकेटकीपर रहे किरण मोरे ने कहा मुझे नहीं लगता कि भारतीय खिलाड़ी बर्नआउट से परेशान हैं। अब हमारा जमाना चला गया। अब वे सब फिट हैं। उनके पास आईपीएल और भारतीय टीम में चोटी के फिजियो और ट्रेनर हैं।
मुंबई इंडियंस के विकेटकीपर कोचिंग के रूप में मोरे को इस बात की अच्छी जानकारी है कि टीमें खिलाडिय़ों को थकान और जेट लेग से निपटाने के लिए किस तरह की रणनीति अपनाती हैं। उन्होंने कहाए श्हमारे पास दो फिजियोए ट्रेनर होते हैं और वे सब टीम के साथ रात दो बजे तक बिजी रहते हैं। ताकि खिलाडिय़ों को अच्छी तरह मैनेज किया जा सके।
आईपीएल की वजह से भारत ने ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड की तरह वल्र्ड कप से पहले कोई कैंप नहीं लगाया। मोरे हालांकि मानते हैं कि आजकल के दौर में टूर्नमेंट से पहले लगा कैंप जरा पुराना तरीका हो गया है। उन्होंने कहा इससे पहले कैंप खिलाडिय़ों को मुख्य रूप से क्रिकेटर्स को उनकी फिटनेस पर काम करने के लिए तैयार करने के लिए आयोजित किए जाते थे। आजकल क्रिकेटर काफी फिट हैं। सभी आईपीएल फ्रैंचाइजी अपने क्रिकेटर्स को काफी प्रफेशनल तरीके से मैनेज करती हैं। एक टीम के रूप में इक_ा होकर काम करने के लिए दो सप्ताह का समय काफी होता है।
शायद भारतीय टीम को वह फायदा न मिले तो पाकिस्तान को है। पाकिस्तानी टीम इंग्लैंड में मेजबान देश के खिलाफ वनडे सीरीज खेल रही है। वहीं बांग्लादेश और वेस्ट इंडीज आयरलैंड में ट्राएंगुलर सीरीज का हिस्सा हैं। इन हालात में शायद न्यू जीलैंड और बांग्लादेश के खिलाफ मैच काफी महत्वपूर्ण हो जाते हैं। अनुभवी विकेटकीपर पार्थिव पटेल ने कहाए श्यह अच्छी बात है कि भारतीय टीम इंग्लैंड जल्दी जा रही है और कुछ मैच खेल रही है। आईपीएल से उबरकर एक टीम के रूप में इक_ा होने के लिए 15 दिन का वक्त काफी होता है।
मुख्य चयनकर्ता एमएसके प्रसाद से जब पूछा गया कि खिलाड़ी आईपीएल की अच्छी बुरी फॉर्म को वल्र्ड कप में भी लेकर जाएंग इस पर उन्होंने कहाए श्हमें खुशी है कि 80 प्रतिशत भारतीय टीम अच्छी फॉर्म में है। उन्होंने कहा सच्चाई यह है कि वह कई करीबी मुकाबलों से होकर आए हैं। उन्होंने आगे कहा आईपीएल में अच्छी फॉर्म मायने रखती है। असली चिंता की विषय कुलदीप यादव हैं जिन्हें केकेआर ने खराब फॉर्म की वजह से टीम से ड्रॉप कर दिया गया था।

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